अश्क़ गिरे तेरी आँखों से
मेरा रोम रोम तब रोता है
नैना बोझिल हों जब तेरे
मेरा दिल फिर तन्हा होता है
जागे तू कभी रात रात भर
मेरा सुकून कहीं खोता है
दोस्ती- प्यार या जीवन सार
रिश्तों का है ये कैसा व्यापार ?
क्यूँ बिन जाने , क्यूँ बिन समझें
बंदा पाप जनम के धोता है
अश्क़ गिरे तेरी आँखों से
मेरा रोम रोम तब रोता है ..
आई हो तुम एक परी सी
मेरे दर्द की एक जड़ी सी
मदमाते फूलों की एक लड़ी सी
या फिर उम्मीदों की ढेर बड़ी सी
कुछ तो है, कुछ भी तो है
कुछ मेरे अन्दर क्यूँ येहोता है
अश्क़ गिरे तेरी आँखों से
मेरा रोम रोम तब रोता है ....
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