रस्ते में धुँधलका है या धुँधलके में रस्ता
इंसान औ जान कि बाजी में कौन है सस्ता,
पल दो पल की जिंदगी में हर पल हुँ बेचैन
चंद लम्हों में खुद कि कसौटी पे खुद को कसता ।
क्या, क्यों, कैसे, कहाँ की है अब दुश्वारियाँ
कही मिले प्यार तो कही धरी हैं रुसवाईयाँ,
किसका मैं आलिंगन करुँ, किसे मार भगाऊ
जब जीवन-समर में बच रही हो बस तन्हाईयाँ
फिर ,
इन सारी उलझनों का कोई तो सबाब दे
मुक्ति दे न दे, कोई तो ख्वाब दे
बहुत तडपाती हैं ये तल्ख़ सच्चाईयाँ
भागू कहाँ औ छिप जाऊ कहाँ, कोई तो जबाब दे !!!!
इंसान औ जान कि बाजी में कौन है सस्ता,
पल दो पल की जिंदगी में हर पल हुँ बेचैन
चंद लम्हों में खुद कि कसौटी पे खुद को कसता ।
क्या, क्यों, कैसे, कहाँ की है अब दुश्वारियाँ
कही मिले प्यार तो कही धरी हैं रुसवाईयाँ,
किसका मैं आलिंगन करुँ, किसे मार भगाऊ
जब जीवन-समर में बच रही हो बस तन्हाईयाँ
फिर ,
इन सारी उलझनों का कोई तो सबाब दे
मुक्ति दे न दे, कोई तो ख्वाब दे
बहुत तडपाती हैं ये तल्ख़ सच्चाईयाँ
भागू कहाँ औ छिप जाऊ कहाँ, कोई तो जबाब दे !!!!