जबसे उस मस्ती का राग सुना है
मन हुम हुम कर गुंजित हुआ है
तान है छेड़ा दिल- दर्पण का
अक्श समेटे फैला धुआं है ।
साज सजाए, शीश नवाए
कब मोरे पिया घर को आए !!
मन हुम हुम कर गुंजित हुआ है
तान है छेड़ा दिल- दर्पण का
अक्श समेटे फैला धुआं है ।
साज सजाए, शीश नवाए
कब मोरे पिया घर को आए !!
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