दर्द भरी दुनिया है, काफी बेदर्द जमाना है
यूँ न हँसो हमपे यारों, ये अपना ही अफसाना है|
उन छोटी-२ गलियो में, उन छोटे-२ घरो में
संस्कार और विचार पैबस्त थे, हमारी भावनाओ में, हमारी जड़ो मे
उस एक दो की गिनती में, वो गुरूजी के ककहरो में
मजा तो बस आता था , उन छोटे-२ शहरों मे
छूटा वो अपना घर , रहा न कोई ठौर ठिकाना है
यूँ न हँसो हमपे यारो , ये अपना ही अफसाना है ||
वो दोस्तों की हैल्लो हाय , वो ताऊ जी का राम राम
कैसे भुलाये हम अपनी बितायी हर एक वो शाम
वो पल पल झगड़ना , फिर ढूँढना हर दोस्त का नया नाम
अनमोल हैं जो पल , जो यादें , कैसे लगायें उनके दाम
घुटने लगा है जीवन, बना अपना ही अस्तित्व निशाना है
तब यूँ न हँसो हमपे यारो , ये अपना ही अफसाना है ||
चार पलों की मस्ती थी , अब चार जुगो की बात है
जिंदगानी के मोड़ अनूठे , इसकी अजब गजब सौगात है
खुशियाँ है क्षणभंगुर , दुखों की यहाँ बरसात है
बनते भाव कभी कभी , सिर्फ टूटते जज्बात हैं
आ गए उस मोड़ पे, जहाँ दर्द का काम ही रुलाना है
फिर यूँ न हँसो हमपे यारो , ये अपना ही अफसाना है ||
दिन हो रहे बोझिल, रातें भी भारी हैं
चल रहा है अंतर्द्वंद ,खुद की लड़ाई जारी है
धुंधली पड़ी है मंजिल, घिसट रही जीवन गाड़ी है
फिर भी अपने ही पीछे , क्यों पड़ी दुनिया सारी है
कहने लगे हैं लोग- ये पागल है, ये दीवाना है
अब तो,
यूँ न हँसो हमपे यारो , ये अपना ही अफसाना है ||
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