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Thursday, 18 August 2011

क्यूँ न आये इस देश में,भैया अपना जन लोकपाल|

हाय !
भ्रष्टों ने कर दिया है देश का बुरा हाल
गरीब हुए है परेशान, जनता है क़र्ज़ से बेहाल
सरकार खजाने लूट रही, देश हो रहा है कंगाल
ऐसे में देश व् देशवासियों से मेरा बस एक सवाल
क्यूँ न आये इस देश में , भैया अपना जन लोकपाल !

रिश्वतखोर बेझिझक रिश्वत खा रहे
अधिकारीगन बस जनता को डरा रहे
बिना काम की कमाई वे मुफ्त में पा रहे
देश की दौलत घोटालो में लुटाये जा रहे
आफत में जब पड़ी हो, गरीबों की रोटी दाल
ऐसे में देश व् देशवासियों से मेरा बस एक सवाल
क्यूँ न आये इस देश में , भैया अपना जन लोकपाल !


सेवा भावना, कर्त्तव्य भावना, सब कुछ इन्होने छोड़ दिया
अपनी सारी निष्ठा को बस पैसे की ओर है मोड़ दिया
कौन बनाये ज्यादा पैसे, इसका है बस होड़ किया
भोली जनता की उम्मीदों को है, इन्होने तोड़ दिया
बढ़ने लगा हो जब भ्रष्टाचारियों का जंजाल
ऐसे में देश व् देशवासियों से मेरा बस एक सवाल
क्यूँ न आये इस देश में , भैया अपना जन लोकपाल !


जिनके भरोसे जनता बैठी, वो दिल्ली भी बहरी है
भैया! अपने पाँव समेटे, इनकी चाल बड़ी गहरी है
पेश किया इन्होने ने भी है अपना एक सरकारी लोकपाल
नियति मंशा साफ़ नहीं है, किया है बस केवल झोलझाल
दायरा बना कर किया है, जो इन्होने बड़ा बवाल
ऐसे में देश व् देशवासियों से मेरा बस एक सवाल
क्यूँ न आये इस देश में , भैया अपना जन लोकपाल !

पी. ऍम. जी रहेंगे बाहर, जज साहब की भी मस्ती है
सांसद महोदय की बात न कर, उनकी भी अपनी हस्ती है
इस भेंड-चाल के खेल में यारो, डूब रही देश की कश्ती है
हम गरीबों की क्या पूछ, जान भी ले लो, सस्ती है 
बरसे दुखवा चहुँओर, जब अपने नेतागण ही लुटे माल 
ऐसे में देश व् देशवासियों से मेरा बस एक सवाल
क्यूँ न आये इस देश में , भैया अपना जन लोकपाल !

लहर उठी है देश में, अन्ना हजारे के वेश में
गर न संभले न जुटे हम, इस कष्ट क्लान्ति क्लेश में
मौका छूटा तो फिर फसेंगे, किसी करप्शन में, किसी केस में 
देश रुकेगा, देश पिछड़गा, स्वप्निल विकास की रेस में
बढ़ने लगेगा फिर से भ्रष्टाचार साल दर साल

ऐसे में याद करो देशवासियों, अपना वो इक सवाल
लाना है देश में, अपना साफ़ सुथरा जन लोकपाल

गर करना है सरे देश को करप्शन मुक्त
लाइए फिर हर राज्य में एक लोकायुक्त
सिटिजन चार्टर में समय सीमा सख्ती से अपनाइए
भ्रष्ट कर्मचारियों को आप नौकरी से भगाइए
स्वछ सुंदर पावन समाज की परिकल्पना
जब लेने लगी हो हिलोरें मार कर उछाल 
ऐसे में मेरे देशवासियों,
लाना ही होगा अपना साफ़ सुथरा जन लोकपाल !!

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