निर्विघ्न
एक अँधेरी सी सुबह
जिंदगी की मंझधार को इंगित करती हुई
एक वीरान सा कमरा
शहर के बीचोबीच मुझे समेटे हुए
एक उथल पुथल करता मष्तिष्क
भविष्य की आशंकओं को खुद में बसाए
एक समाज, एक परिवार
सफलता की कामना करता हुआ
एक लड़खड़ाती सी सोच
मनोविकारो को उद्वेलित करती हुई
एक नर्म बाहों का आसरा
हरपल टूटते वुजूद को थामने को तैयार
एक दौर सफलता असफलता का
धीरे धीरे से गुजरता हुआ
एक शून्य सा समय
बताओ ! मन ठहरे या चलता जाए.…।
एक अँधेरी सी सुबह
जिंदगी की मंझधार को इंगित करती हुई
एक वीरान सा कमरा
शहर के बीचोबीच मुझे समेटे हुए
एक उथल पुथल करता मष्तिष्क
भविष्य की आशंकओं को खुद में बसाए
एक समाज, एक परिवार
सफलता की कामना करता हुआ
एक लड़खड़ाती सी सोच
मनोविकारो को उद्वेलित करती हुई
एक नर्म बाहों का आसरा
हरपल टूटते वुजूद को थामने को तैयार
एक दौर सफलता असफलता का
धीरे धीरे से गुजरता हुआ
एक शून्य सा समय
बताओ ! मन ठहरे या चलता जाए.…।
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